मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

हरफनमौला था मेरा यार कमलेश

कमलेश ही था उसका नाम। बड़ा मस्त और दिलफेंक। अगर वह किसी से मिल ले तो उसकी सारी हरारत समाप्त हो जाये। कहने को तो वह बनिया था लेकिन बनियागीरी से कोसों दूर था। अगर उसके पास पैसे हों तो वह हातिमताई बन जाता था। उसे इस बात की फिक्र नहीं रहती थी कि यदि यह पैसे खत्म हो जायेंगे तो क्या होगा। वह कल की तो सोचता ही नहीं था। उसके पिता कांग्रेस के बड़े नेता थे। पेठे का अच्छा खासा कारोबार था। जब वह कालेज में पढता था। उसकी हरकतें मज़ा तो दे सकतीं थीं परन्तु किसी को हानि नहीं पहुचाती थीं। कालेज के दिनों में वह एक छात्र संगठन यानि एन एस यू आई से जुड़ गया। घर पर सब कुछ था इसलिए वह बेफिक्री से नेतागीरी करता रहा। उसकी गाने बजाने और अभिनय में काफी रूचि थी इसीलिए वह इप्टा में शामिल हो गया। उस दौरान उसने कई नाटकों में भागीदारी की लेकिन वह मशहूर हुआ लोकगायक के रूप में। उन दिनों आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता पर शोध कर रहा था। उसी समय प्रख्यात रंगकर्मी सफ़दर हाशमी नुक्कड़ नाटक करते हुए काल के गाल में समां गए थे। उनकी शहादत से समूचा देश स्तब्ध रह गया। आगरा की सभी नाटक और साहित्यिक संस्थायों ने साझा मंच से उनकी स्मृति में शहर भर में नुक्कड़ नाटक और कवि सम्मलेन किये। इस साझा मंच में राजेश्वर प्रसाद, जितेंद्र रघुवंशी, हरिवंश चतुर्वेदी आदि शामिल थे। इसी दौरान मेरी कमलेश से मुलाकात हुई। सफ़ेद भकाभक कुरते पजामे में वह काफी स्मार्ट एवं सुदर्शन लग रहा था। उन दिनों उसके गीत लू लू तोहे पांच बरस न भूलू की पूरे आगरा में धूम मची हुई थी। दिवंगत वसंत वर्मा और कमलेश की जोड़ी ने आगरा को अपने क्रान्तिकारी गीतों की गायकी से आल्हादित कर दिया। इस दौरान उन्होंने स्वर्गीय राजेंद्र रघुवंशी रचित कई जनगीतों का गायन भी किया। उसी समय मेरी कमलेश सिंघल, वसंत वर्मा तथा सतीश महेन्द्रू से दोस्ती हुई। वह दोस्ती इतनी परवान पर पहुंची और हमारी दोस्ती के चर्चे चारों तरफ होने लगे। हमारी मंडली में कमलेश गायक, वसंत संगीतकार तथा सतीश अभिनेता और में यानि महाराज सिंह परिहार कवि था। किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए हम चारों पर्याप्त थे। किसी कारणवश कमलेश इप्टा से अलग हो गए और अपनी संस्था लोकरंग व मेरी संस्था इन्द्रधनुष को सक्रिय करने में जुट गए। उन्ही दिनों इन्द्रधनुष ने राजेंद्र मिलन रचित भीमाबाई होलकर खंडकाव्य पर आधारित नाटक का मंचन सूरसदन में किया। यह इन्द्रधनुष की पहली प्रस्तुति थी। इस नाटक का निर्देशन कमलेश सिंघल ने ही किया था। इस नाटक के परिकल्पनाकर थे हरी मोहन शर्मा साथी। जो अब संसार में नहीं हैं । वह बड़े मस्त आदमी थे। खाने पीने के शौक़ीन । मिठाई पर तो वे जान देते थे हालाँकि वह मधुमेह के मरीज़ थे फिर भी वह कभी अपनी इस बीमारी की चिंता नहीं करते थे। मरहूम उस्ताद अनवार खान हमारे नाटक में तबलावादक के रूप में कार्य कर रहे थे। इस नाटक में मैंने और राजेंद्र मिलन ने पहली बार अभिनय किया। इस नाटक में लगभग सभी कलाकार बिलकुल नए थे। यह नाटक काफी सफल रहा। अरे बात तो कमलेश के बारे में हो रहीं थी। मैं जाने कहाँ भटक गया। वह यारों का यार था। कलाकारों व कवियों के लिए उसका दालमोंठ और पेठे का दरबार हमेशा खुला रहता था। जब वह पी लेता था तो महिलाओं की जन्मपत्रियाँ खोलने लगता। तमाम की हिस्ट्री उसको पता थी। कौन किस का असली बाप है और जवानी में किसके किससे सम्बन्ध थे। उनकी किस्सागोई में रंडियों से लेकर कवि, रंगकर्मी, नेता, सेठ, पत्रकार सभी शामिल होते थे। उसकी नवीनतम जानकारियों से मैं तथा ताज प्रेस क्लब में मेरे अभिन्न मित्र उपेन्द्र शर्मा, कवि राज कुमार रंजन, अशोक सक्सेना सभी अवगत होते थे। वह दिल का बहुत उदार था। आगरा की कई नेत्रियों की उसने काफी मदद की थी। उसके भोलेपन अथवा उदारता का लाभ उठाने के लिए महिलाएं गरीब लड़कियों की शादी की झूठी बात करके उससे पेठा आदि मंगवा लेती थी फिर उन्हें मित्रो व रिश्तेदारों को अतिथि सत्कार के रूप में परोसतीं थी। लगभग ४५-५० वर्षा की आयु में भी उसकी हरकतें युवाओं जैसी होती थी। एकबार बल्केश्वर के मेले में उसने किसी को छेड़ दिया.कमलेश तो चलते बने लेकिन वसंत पकडे गए । मैंने बड़ी मुश्किल से वसंत को पुलिस के चंगुल से छुड्वाया। जैसे ही यह मामला ख़त्म हुआ कमलेश प्रकट हो गए। उस समय उसके चेहरे पर न तो अफ़सोस का भाव और न ही पछतावा। वह बोला यार मन नहीं माना। आज भले ही कमलेश हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उसकी शरारतें और मस्ती मन को स्पंदित करती है.

7 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग्जगत में आपका हार्दिक स्वागत है...
    शुभकामनाऑं सहित
    चन्दर मेहेर
    lifemazedar.blogspot.com
    kvkrewa.blogspot.com

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  2. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

    मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

    यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

    शुभकामनाएं !


    "टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

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  3. आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
    आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
    इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
    उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
    आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
    और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
    यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


    वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

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  4. बेहतरीन व्यक्तित्व के स्वामी थे..

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  5. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  6. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,

    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,

    कलम के पुजारी अगर सो गये तो

    ये धन के पुजारी वतन बेंच देगें।

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " http://janokti.feedcluster.com/ से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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