गुरुवार, 15 जुलाई 2010

इलाज का मकड़जाल-मरीज़ बेहाल

पूर्ण समन्वित


हमारी चिकित्सा व्यवस्था मकड़जाल सी बन गई है। हर डाक्टर और अस्पताल के अपने तरीके हैं इलाज करने के। हर बीमारी का अलग-अलग रेट है। शायद इसीलिए बीमा कम्पनियों ने मेडिक्लेम पॉलिसी की कैशलैश व्यवस्था का कुछ दिन पहलने अलविदा कह दिया था। परंतु अस्पतालों के संचालकों से आपसी वार्तालाप में यह मामला सुलझ गया लगता है। अतः अब पुनः बीमाधारकों को इस तरह के इलाज की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वास्तव में देखा जाये तो चिकित्सा जैसा सेवा का पेशा विशुढ्य व्यापार में बदल गया है। हर बीमारी के लिए कई तरह के टेस्ट हैं। यह टेस्ट या तो अस्पतालों में मनमानी दरों पर होते हैं अथवा डाक्टरो को जहां से अच्छा खासा कमीशन मिलता है। वहां मरीज को कराने की सलाह दी जाती है। चिकित्सा के मकड़जाल से लोगों का निकलना मुश्किल लग रहा है। अभी खबर आयी थी कि एम्स में आपरेसन के लिए वेटिंग साल से अधिक है। इसका मतलब यह हुआ कि आम आदमी को चिकित्सा रूपी व्यापारियों की शरण में जाना पड़ेगा और उनकी मनमानी दरों पर इलाज करवाना होगा। संभवतः बीमा कंपनियों ने कैशलैश चिकित्सा की सुविधा इसीलिए वापस ली थी कि कुछ अस्पताल मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे हैं। बीमारियों के इलाज के दरें इन अस्पतालों में अलग-अलग है। कुछ बेमतलब के टेस्ट भी किये जाते हैं। उनकी भरपाई भी बीमा कंपनियों को करनी पड़ती है। अब शायद अस्पताल संचालकों ने बीमा कंपनियों को चिकित्सा दरों की एकरूपता का आश्वासन दे दिया है। चिकित्सा बीमा धारकों के अतिरिक्त देश की सर्वाधिक आबादी सीधे डाक्टर अथवा अस्पताल में इलाज कराने जाती है। वहां उसकी किस तरह हजामत बनाई जाती है। किसी से छिपा नहीं है। उनके इलाज से मरीज अच्छा हो या न तो लेकिन उसके तीमारदारों की तबियत जरूर बिगड़ जाती है। नाना प्रकार के टेस्ट होते हैं। इनकी फीसें इतनी अधिक होती हैं कि आम आदमी देने में असमर्थ रहता है। लेकिन सवाल मरीज की जिंदगी का होता है। इसीलिए वह कर्ज लेकर, मकान अथवा खेत को गिरवीं रखकर डाक्टरों व अस्पतालों के मालिकों का मुंह बंद करता है। इस चिकित्सा से जुड़े लोगों में से कुछ लोग तो इतने क्रूर है कि मरीज के मरने से पहले ही सारा हिसाब-किताब बराबर कर लेते हैं। अपनी फीस के लिए मरे मरीज को वेंटीलेटर के सहारे जिंदा दिखाकर भरपूर कमाई करते हैं। इस ओर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी होगी। हर बीमारी के इलाज तथा टेस्ट की दरें निर्धारित करनी होंगी। इसी प्रकार डाक्टरों की आपरेशन फीस, विजिट फीस व परामर्श फीस भी निर्धारित करनी होगी। उनकी फीसों का जिला स्तर पर पर्याप्त प्रचार-प्रसार होना चाहिए जिससे मरीज और उसके तीमारदार लुटने से बच सकें।

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