शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

राहुल भ्रष्टाचार पर चुप क्यों


भ्रष्टाचार के बारे में सारा देश मौन है। लगता है की सबने इस अपराध को स्वीकार कर लिया है। जब हमने अपराध को स्वीकार कर ही लिया है तो विकास के नाम पर नारेवाज़ी क्यों। राहुल गाँधी कहते हैं की उत्तर प्रदेश में मनरेगा सहित केंद्र की अन्य योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वन नहीं हो रहा है। सरकार गरीबों की सुध नहीं ले रही है। उन्हें एक बात माननी होगी की जब केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार को अपराध ही नहीं माना तो उत्तर प्रदेश में क्या गलत हो रहा है। सरे देश में भ्रष्टाचार का परचम लहरा रहा है। विकास के नाम पर भ्रष्टाचार सही नहीं ठहराया जा सकता लेकिन सेना सहित प्रशासन के सभी अंगों में यह पूरी तरह हाबी है। वस्तुत आज ईमानदार आदमी को घरवाले भी पसंद नहीं करते। समाज में भी उसका स्थान निरंतर नीचे की और जा रहा है। और तो और मालिक भी ईमानदार को पसंद नहीं करते। जो मालिकों का टैक्स बचा सके। उनके काले धंधे को चला सके। रिश्वत देकर उनकी समस्या का समाधान करवा सके। मेरा मानना हैं की देश विदेशी हमले से नहीं अपितु भ्रष्टाचार से गुलाम होगा। आज इस कथित महान देश में हर आदमी बिकाऊ है। संसद, विधायकों को तो जनता ने खुलेआम बिकते देखा है। नौकरशाही इसमें पूरी तरह लिप्त है। न्याय भी बिना पैसे के नहीं मिलता। इससे बड़ा इस देश का दुर्भाग्य क्या होगा जहाँ रिश्वत देकर सेना में सिपाही भर्ती होता है।रिश्वत देकर भर्ती युवा में क्या देशभक्ति की भावना होगी। वह दुश्मन के सामने गोली चलाएगा या पीठ दिखाकर भाग जायेगा। पुलिस में बिना रिश्वत दिए कोई युवा प्रवेश नहीं कर सकता। आजकर डाक्टर और इंजीनीयर भी पैसे देकर तैयार किये जाते हैं। भगवान के दर्शन भी बिना पैसे के नहीं हो सकते। जब सब कुछ पैसा ही है तो फिर इस भ्रष्टाचार पर घडियाली आंसूं क्यों। क्या राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश को कोसने की बजे अगर भ्रष्टाचार के खिलाफ देशव्यापी अभियान छेड़ें तो उनके राजनीतिक भविष्य के लिए अच्छा होगा। लेकिन वह ऐसा नहीं करेंगे। उनकी पार्टी के अधिकांश संसद, विधायक और मंत्री अरबपति और करोडपति हैं। वह यह भी जानते हैं की इतना पैसा बिना बेईमानी के नहीं आ सकता। वह अपनी पार्टी का टिकिट भी उसी व्यक्ति को देंगे जो चुनाव का खर्चा उठा सके। आज उनके साथ जो युवा नेता हैं। वह सब धनी हैं। गरीबी की लड़ाई लड़ने के लिए राहुल गाँधी को भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आन्दोलन करना होगा. परन्तु क्या वह यह साहस कर सकेंगे। क्या राहुल गाँधी अपने पिता के नाना जवाहर लाल नेहरू की तरह भ्रष्टाचारियों को खुलेआम फांसी देने की वकालत करेंगे।

1 टिप्पणी:

  1. कहाँ चुप है राहुल भरशटाचार पर, खूब बढ़-चढ़ कर बहती गंगा में हाथ धो रहा है - मान, बेहन और जीजा के साथ. सभी तो ग़रीबों के खून पर पल रहे हैं.

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