शनिवार, 1 मई 2010

डा. एम.एस. परिहार के दो समसामयिक गीत

एक और संग्राम
आजादी है अभी अधूरी
पाये जनता रोटी पूरी।
तंत्र लोक से दूर हुआ है
अवमूल्यन भरपूर हुआ है।।
आज देश टुकड़ो में बंटता जीना हुआ हराम।
अभी देश को लड़ना होगा एक और संग्राम।।
सपनों की लाशें आवारा
बेबस का है नहीं गुजारा।
माली ने गुलशन मसला है
गांधी का भारत कुचला है।।
है मसजिद में मौन रहीमा और मंदिर में राम।
अभी देश को लड़ना होगा एक और संग्राम।।
देहों का व्यापार हो रहा
सदियों का आधार खो रहा।
मजहब ज़हर उगलते सारे
लगते हैं नफ़रत के नारे।।
! सुभाष के यौवन जागो जाये हो बुरा परिणाम।
अभी देश को लड़ना होगा एक और संग्राम।।
वन्दे मातरम् के जनगण हम
इस माटी के कण-कण में हम।
अमर जवान सो पायेगा
देश धर्म पर मिट जायेगा।।
तम सूरज को नहीं खा सके और सिंदूरी शाम।
अभी देश को लड़ना होगा एक और संग्राम।।


कफन बांध लो

सदियों से सोयी जनता को आज जगाने आया हूं।
मैं शांति का नहीं क्रान्तिका बिगुल बजाने आया हूं।।
राज राज्य के शब्दजाल से
कब तक तुम भरमाओगे।
अपनी कुर्सी की खातिर
कब तक हमको मरवाओगे।।
निर्बल के बलराम कहां हो
कहां छिपे द्वोपदी के वीर।
लूट लूटकर मेरी माटी
तुम्हीं बनाते रहे फकीर।।
शोषण के इस अंधकार में दीप जलाने आया हूं।
मैं शांति का नहीं क्रान्तिका बिगुल बजाने आया हूं।।
बोते रहे हमेशा नफरत
और अशिक्षा का साम्राज्य।
टूटा आज न्याय का घंटा
फैल गया भ्रष्टों का राज।।
मसली कलियां इस डाली की
फूलों का जीवन नीलाम।
पांखड़ों का गले लगाकर
किया सत्य का काम तमाम।।
सावधान ऊंची मीनारो, मैं तुम्हे बताने आया हूं।
मैं शांति का नहीं क्रान्तिका बिगुल बजाने आया हूं।।
सब हाथों को काम मिले
और धरती की प्यास बुझे।
घर-घर में उजियारा करदे
बस तेरी है आस मुझे।।
आज मिटादे तू शोषक को
लेकर नाम भवानी का।
परिवर्तन का बिगुल बजादे
ये ही काम जवानी का।।
कफन बांध लो अपने सिर पै, मैं भगत बनाने आया हूं।
मैं शांति का नहीं क्रान्तिका बिगुल बजाने आया हूं।।

48 विनय नगर, शाहगंज आगरा-२८२०१०
संपर्कः 0562-2276358, ९४११४०४४४०

3 टिप्‍पणियां:

  1. अद्भुत!
    सपनों की लाशें आवारा
    बेबस का है नहीं गुजारा।
    माली ने गुलशन मसला है
    गांधी का भारत कुचला है।।
    है मसजिद में मौन रहीमा और मंदिर में राम।
    इतनी ओजपूर्ण रचना ब्लॉग पर पहली बार पढ़ी है।

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    इसे 08.05.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह 06 बजे) में शामिल किया गया है।
    http://chitthacharcha.blogspot.com/

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  3. डा.एम.एस .परिहार आप के गीत पहली वार पढ़े ,.अच्छे लगे.समकालीनता का गहरा बोधऔर यथार्थ की दृष्टि संवेदना से परि पूर्ण है मेरी शुभ कामनाएं.

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