शनिवार, 3 जुलाई 2010

पेट्रो उत्पादों की कीमतें आसमान पर

सरकार के इस कदम से महंगाई में वृद्धि होगी, जिसे सरकार रोक नहीं पायेगी। वैसे भी विगत कई वर्षों से सरकार ने महंगाई रोकने का कोई प्रयास नहीं किया है। पेट्रो  उत्पाद मंहगे होने से उत्पादों व सेवा की लागत बड़ेगी और उसे आम जनता से वसूल किया जायेगा। सरकार को गरीबें की स्थिति का ख्याल रखना चाहिए। अगर इसी तरह मंहगाई बढ़ती रही तो गरीबी तो नहीं अपितु मिट जाएगा। मंहगाई के कारण आम आदमी वैसे ही नारकीय जीवन जी रहा है। निरंतर बढ़ती महंगाई को सरकार इसलिए नहीं रोकती क्योंकि पूंजीपतियों के धन से ही चुनाव लड़े जाते है। वह पार्टियों को दी धनराशि को ब्याज सहित आम आदमी से वसूल करते है। सरकार को जनविरोधी करार देती है। सरकार की नीतियों के कारण कंगाली में आटा गीला हो रह है। लगता है कि इस देश में गरीबों से जीने का अधिकार छीना जा रहा है।
लोकतंत्र में विपक्षी दल सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करने के लिए होते हैं लेकिन लगता नहीं कि विरोध पक्ष की आम जनता से कोई हमदर्दी है। वास्तव में सभी दलों का चरित्र एक ही है। वह विरोध के नाम पर नाटक तो बहुत करते है लेकिन सरकार की जन विरोधी नीतियों पर अकुंश नहीं लगा पाते। देश का विरोध पक्ष नकारा हो गया है। अब जनता को अपना संघर्ष स्वयं करना होगा।
सभी राजनैतिक दल गरीबों के लिए घड़ियाली आंसू बहाते है। उनका एक मात्र लक्ष्य येन-केन-प्रकारेण सत्ता हासिल कर उसका उपभोग करना है। किसी भी दल के एजेंडे में गरीबी और मंहगाई नहीं है। अतः इनसे कोई अपेक्षा नही की जा सकती। अब जनता को ही सामने आना होगा। आज देश में जनांदोलन की जरूरत है। अगर जनता जागरूक होकर सड़कों पर आ गई तो मंहगाई पर अंकुश लगेगा। क्या सर्कार यह नहीं कर सकती की महँगी गाड़ियों वालों से अधिक कीमत वसूल करे और दोपहिया वाहनों को रहत दे. उसे याद रखना होगा की दोपहिया वहां चलने वाले अधिकांश अल्पवेतन भोगी होते हैं. पेट्रोल की कीमतों से उसके घर का बजट गड़बड़ा गया है.
वस्तुतः पेट्रो  उत्पाद की वृद्धि का जन जीवन पर व्यापक असर पड़ा है. इसने जनता  की कमर तोड़ कर रख दी है। सरकार की राजकोषीय घाटे को कम करने की बात तो समझ में आती है लेकिन पेट्रो  उत्पादों पर केंद्र व राज्य के भारी भरकम टैक्सों को वह क्यों नहीं कम करती? उत्तर प्रदेश में ही पेट्रोल  पर 26 फीसदी वैट है। अगर सरकार अपने अनुत्पादक खर्चे कम करे और पेट्रो  उत्पादों से करों का बोझ हटाए तो स्थिति सुखद हो सकती है।

1 टिप्पणी:

  1. baat to 100% sahi hai. mahngaai ki maar to sabhi jhel rahe, badi gaadi wale ho ya bike wale. paksh ho ya vipaksh sabhi is mudde par bolte, par natejaa sifar. mere vichaar se sabhi ati aawshyak wastu ka daam ghata kar aadha kar dena chaahiye aur sabhi vilaasita ki wastuon ka daam doguna kar dena chaahiye. shiksha, swaasthya muft aur ek samaan sabhi ko milna chaahiye. arthvyawastha aur janta keliye shayad ye upyukt ho. shubhkaamnaayen.

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