शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

ब्लॉग पर महिला रचनाकार

ब्लॉग की दुनियां में महिला रचनाकारों का बोलवाला है। इसमें उनकी सृजनशीलता स्पष्ट दिखाई दे रही है। वैसे अभी तक लेखन में पुरुष रचनाकारों की तूती बोलती है लेकिन परिवर्तन के दौर में महिला सर्जक भी अपनी कलम लेकर मैदान में आ गई हैं। उनकी रचनाधर्मिता केवल रूमानी नहीं है अपितु यथार्थ के कठोर धरातल से पाठकों को रूबरू करातीं हैं।
वीर बहूटी ब्लॉग पंजाब की निर्मल कपिला का है। इस ब्लॉग का संदेश ‘अपनी रूप् का शहर - कुछ कल्पनाएं’ वस्तुतः रचनाकार की संवदेनशीलता का परिचायक है। इस ब्लॉग पर कथा, गजल व अपनी बात हैं जिसमें ब्लॉगर समूचे जीवन के विभिन्न आयामों को प्रस्तुत करती हैं। इस ब्लॉग पर प्राण शर्मा की गजल दृष्टव्य है-
आपको रोका है कब मेरे जनाब
शौक से पढ़िये मेरे दिल की किताब
बात सोने पर सुहागा सी लगे
सादगी के साथ हो तो कुछ हिजाब
अपने अमेरिका प्रवास के दौरान ब्लॉगर मीट को भी वह अपनी बात के तहत बड़ी संजीदगी के साथ प्रस्तुत करतीं हैं कि जब उन्हें वहां अजीत गुप्ता से मुलाकात हुई। अपनी बात को सचित्र पोस्ट करके उन्होंने इसमें जीवंतता भरने का प्रयास किया है।
जीवन की कटु अनुभूतियां भी उनके पास कम नहीं हैं। तभी तो वह अपनी बात में लिख बैठतीं हैं कि अपना देश अपना ही होता है इस अनूभूति को वह अपनी पोस्ट पर उकेरतीं हैं -
‘‘पंजाबी में एक कहावत है ‘जो सुख छजू दे चौबारे ओह, न बल्ख न बुरारे‘ यानी कहीं भी घूम आओ मगर जो सुख अपने घर में आकर मिलता है वो कहीं नहीं।
रिटायरी कालोनी पोस्ट पर वह रिटायर लोगों के दर्द को साझा करतीं हैं-
‘शायद अपना घर सबका ही सपना होता है। फिर जब आदमी अपने जीवन का सुनहरी समय सरकारी मकान में रहकर गुजार दे तो उसके लिए तो अपना घर और भी अहम बात हो जाती है। फिर जब आदमी रिटायर होने के करीब आता है तो लोग अक्सर ये सवाल करते हैं, अपना घर बना लिया, कहां बना रहे हो अपना घर। उनकी पंखनुमा कविता भी सहज ही प्रभावित करती है।

गजल की ब्लॉगर श्रद्धा जैन सिंगापुर में रहतीं हैं लेकिन उनका ब्लॉग नारी चेतना के नये आयाम गढ़ रहा है। मैं मुहब्बत हूं, मुहब्बत तो नहीं मिटती है.... एक खुश्बू हूं, जो बिखरे तो सबा हो जाए, इस शेर के माध्यम से वह अपने परिचय की शुरूआत करतीं हैं।
यह पूर्णरूपेण गजल को समर्पित है। इनमें श्रद्धा के लेखन के बहुआयाम दिखाई पड़ते हैं। उनका लेखन परम्परागत रूप से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। वह कलम को अभिव्यक्ति का सशक्त हथियार मानतीं हैं और पोस्ट करतीं हैं-
सच्चे शब्दों में सच के अहसास लिखेंगे
वक्त पढ़े जिसको कुछ इतना खास लिखेंगे
गीत गजल हम पर लिखेंगे लिखने वाले
हमने कलम उठाई तो इतिहास लिखेंगे
उनकी गजल मन की गहराइयों तक उतरती प्रतीत होती है। उनके एक एक शब्द में आशा की किरणें अपनी आभा बिखेरतीं हैं। वह अपने अहसासों को यूं बयां करतीं हैं-
काश बदलती से कभी धूप निकलती रहती
जीस्त उम्मीद के साए में पलती रहती
फर्ज दुनिया के निभाने में गुजर जाए दिन
और हर रात तेरी याद मचलती रहती
शांत दिखता है समुन्दर भी लिए गहराई
जबकि नदिया की लहर खूब मचलती रहती
जब ब्लोगर अपने अतीत में खो जातीं हैं तो उनका दर्द सहज भी उभर आता है-
रोशन थे आंखों में वो उजाले कहां गए
आखिर हमारे चाहने वाले कहां गए

2 टिप्‍पणियां:

  1. काफी अच्छे से लिखा है .... प्रभावित हुई

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  2. ब्लॉग पर महिला रचनाकारों का ब्लॉग चिंतन पढ़कर अच्छा लगा ।

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