शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

भ्रष्ट जजों की बर्खास्तगी

‘जज की सेवा ऐसी है जिसमें ईमानदारी और उच्च पेशेवर मूल्यों को बचाए रखना पड़ता है।‘
बर्खास्त जजों की याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आशा का संचार करती हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में उसका कड़ा रुख है। यह ऐसे समय में और अधिक महत्वपूर्ण है जबकि विधायिका और कार्यपालिका अपनी प्रासंगिकता खोने के कगार पर है। न्यायपालिका के प्रति देश के नागरिकों को अभी काफी उम्मीदें हैं। इस निर्णय से साफ हो गया कि न्यायपालिका जब अपने जज को भ्रष्टाचार के मामले में माफी देने को तैयार नहीं है तो नेताओं और नौकरशाहों को भी उससे कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। वस्तुतः देश का पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हुआ है। लगता है कि लोगों ने भ्रष्टाचार को स्वीकार कर लिया है। इसीलिए जहां देश में गरीबी बेतहाशा बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर धनाढ्यों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। यह बढ़ोतरी उत्पादन और सेवा से नहीं अपितु भ्रष्टाचार के द्वारा अर्जित हो रही है। यह इस गरीब देश का दुर्भाग्य है कि हमारी गरीबों की लोकसभा में 300 माननीय सांसद करोड़पति हैं। हालांकि पैसे वाला होना कोई बुरी बात नहीं है। सवाल यह है कि यह लोग कैसे पैसे वाले हुए। आज अधिकांश नेताओं की जन्मपत्राी खंगाली जाये तो अधिकतर राजनीति से पहले साधारण हैसियत के लोग थे। अचानक उनकी दौलत इतनी बढ़ गई कि वह पूंजीपतियों के शामिल हो गये। यही स्थिति नौकरशाहों की है। लेखपाल से लेकर लिपिक, निरीक्षक से लेकर अधिकारी तक सभी भ्रष्टाचार की गंगा में जमकर गोते लगा रहे हैं। इन लोगों की नौकरी की भी खास परवाह नहीं होती क्योंकि इन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए से इतना बेतहाशा धन कमा लिया है कि उन्हें भविष्य की चिंता नहीं है। हमारी कार्यपालिका भ्रष्टाचार के मामले पर घड़ियाली आंसू तो बहाती है लेकिन कोई कड़ी कार्रवाई नहीं करती। आखिर करे भी तो कैसे, सब उनके भाई-बंधू ही तो हैं। वह भी भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगाकर इस ऊंचाई पर आए हैं। भ्रष्टाचार की यह दास्तां जीवंत है कि हर वर्ष विकास के नाम पर अरबों-खरबों रुपया खर्च होता है लेकिन विकास के कहीं दीदार नहीं होते। सरकार की बहुत सी जनहितकारी योजनाएं कागजों पर हीं चल रहीं हैं। इस गड़बड़ घोटाले में शासन-प्रशासन ही नहीं अपितु सेवा का ढांेग करने वाले कुछ एनजीओ भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उच्च न्यायालय और आधीनस्थ न्यायालयों को सबक लेना चाहिए िकवह किसी कीमत पर भ्रष्टाचारियों को राहत न दें। सरकार को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़नी होगी क्योंकि हमारी विकास की घास को भ्रष्टाचार रूपी जानवर जमकर चर रहे हैं।

1 टिप्पणी:

  1. बहुत ही सार्थक प्रस्तुती ओर सुप्रीमकोर्ट का एकदम सही निर्णय ,सुप्रीमकोर्ट ही नहीं सभी न्यायलय को सख्त से सख्त निर्णय लेने होंगे ,क्योकि भ्रष्टाचार पूरी इंसानियत के लिए खतरा है |

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