मंगलवार, 31 मई 2011

काहे री नलिनी उपन्यास पर उषा यादव को मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कार


काहे री नलिनी उपन्यास पर उषा यादव को
मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कार

आगरा। बहुमुखी लेखन की अप्रितम साहित्यकार डॉ. उषा यादव को मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी ने उनके उपन्यास काहे री नलिनी को अखिल भारतीय वीरसिंह देव पुरस्कार देने का फैसला लिया है। साहित्य अकादमी के इस निर्णय से शहर के साहित्यकर्मियों में उत्साह और हर्ष की लहर दौड़ गई। केन्द्रीय हिंदी संस्थान आगरा एवं डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर विश्वविद्यालय के संस्थान कन्हैयालाल, माणिकलाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ के पूर्व प्रोफेसर डॉ. यादव को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान लखनऊ से बाल साहित्य का सर्वोच्च सम्मान बालसाहित्य भारती तथा विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान प्राप्त हो चुका है। सूचना प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उन्हें भारतेन्‍द्रु हरिश्चंद्र पुरस्कार मिला है। उनका बाल उपन्यास पारस पत्थर चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट से पुरस्कृत हुआ है।
देश के वरिष्ठ बाल-साहित्यकार कानपुर निवासी चन्द्रपाल सिंह यादव मयंक की सुपुत्री एवं केआर महाविद्यालय मथुरा के पूर्व प्राचार्य तथा उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा आयोग के सदस्य डॉ. राजकिशोर सिंह की धर्मपत्नी डॉ. उषा यादव टुकड़े टुकड़े सुख, सपनों का इन्द्रधनुष, जाने कितने कैक्टस, चुनी हुई कहानियां, सुनो जयंती, चांदी की हंसली आदि कहानी संग्रह तथा प्रकाश की ओर, एक ओर अहल्या, धूप का टुकड़ा, आंखों का आकाश, कितने नीलकंठ, कथान्तर, अमावस की रात, काहे री नलिनी आदि उपन्यास एवं सपने सच हुए, हिंदी साहित्य के इतिहास की कहानी, राजा मुन्ना, अनोखा उपहार, कांटा निकल गया, लाख टके की बात, जन्म दिन का उपहार, दूसरी तस्वीर, दोस्ती का हाथ, मेवे की खीर, खुशबू का रहस्य, पारस पत्थर, नन्हा दधीचि, लाखों में एक, राधा का सपना, भारी बस्ता, तस्वीर के रंग सांगर मंथन आदि बाल साहित्य की पुस्तकें देश के लब्ध प्रतिष्ठित प्रकाशनों से प्रकाशित हुई हैं।
आपकी तर्पण कहानी का अंग्रेजी, सपनों का इन्द्रधनुष का उड़िया, मरीचिका कहानी का तेलगू, सुनो कहानी नानक बानी का पंजाबी भाषा में अनुवाद हुआ है। राजस्थान शिक्षा परिषद की कक्षा 6 की पाठ्य पुस्तक में उनकी कहानी दीप से दीप जले, महाराष्ट्र हायर सैकेंड्री बोर्ड की नवीं कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में ऊंचे लोग कहानी संकलित है।
डॉ. उषा यादव साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था इन्द्रधनुष की अध्यक्ष एवं प्राच्य शोध संस्थान की सचिव भी हैं। शहर की इस बहुआयामी लेखन की धनी लेखिका को मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी पुरस्कार मिलने पर पदमश्री डा. लालबहादुर सिंह चौहान, चौ. सुखराम सिंह, डा. त्रिमोहन शाक्य तरल, डॉ. सुषमा सिंह, शिव सागर, डॉ. राजकुमार रंजन, डॉ. चन्द्रशेखर राठौड, कैलाश चौहान मायावी, डॉ. महाराज सिंह परिहार, डॉ. शशि तिवारी, जितेन्द्र रघुवंशी आदि ने हर्ष व्यक्त किया है।

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