शुक्रवार, 14 मई 2010

टी-20 से शर्मनाक विदाई


आखिर वहीं हुआ जिसकी आशंका थी। अपने को टी-20 क्रिकेट का शहंशाह कहने वाला भारत सेमीफायनल में भी नहीं पहुंच सका। श्रीलंका ने वेस्ट इंडीज में उसकी शर्मनाक विदाई कर दी। इस टी-20 विश्व टूर्नामेंट से यह जाहिर हो गया कि अब हमारे खिलाड़ियों में जीतने की भूख के स्थान पर धन कमाने की भूख अधिक हावी हो गई है। वस्तुतः आईपीएल जैसे धनकमाऊ नौटंकी ने क्रिकेट का बहुत बड़ा नुक्सान किया है। जो बल्लेबाज आईपीएल में अपनी सफलता का परचम लहरा रहे थे। वह इस टूर्नामेंट में बुरी तरह धराशायी हो गये। आखि रवह खेलते भी क्यों ? न तो वहां आईपीएल जैसा अनाप-शनाप पैसा था और न ही उफनता ग्लैमर। रही देश के लिए खेलने की बात तो वह तो कब की काल-कवलित हो गई है। सचिन जैसे लीजेंड खिलाड़ी का इस टूर्नांमेंट में न खेलना आखिर क्या साबित करता है ? उनके पास अपनी नीलामी का समय है। बेतहाशा पैसों के लिए आईपीएल की टीमों में शामिल होने तथा अपना जौहर दिखाने का समय है। लेकिन विश्व टूर्नांमेंट जहां देश की इज्जत दांव पर लगी हो। वहां जाकर न खेलना क्या साबित करता है। क्या क्रिकेटरों के लिए पैसा ही सब कुछ हो गया है। अगर पैसा ही सब कुछ है और देश का सम्मान उनके लिए कुछ भी नहीं है तो देश उनकी परवाह क्यों करता है। क्यों उन्हें खेल पुरस्कार देता है ? क्यों उन्हें पद्मश्री (जिसे लेने की भी उन्हें फुरसत नहीं होती) देता है। अब समय आ गया है कि क्रिकेट प्रेमी इस तथ्य का समझें कि केवल पैसों की खातिर खेलने वाले इन भगवानों की नीयत का सही मूल्यांकन करें। उनके पीछे पागल न बनें। बीसीसीआई से इस मामले में किसी भी तरह की उम्मीद करना बेकार है। क्या वह यह शर्त नहीं लगा सकती थी कि आईपीएल में खेलने वाले क्रिकेटरों को वर्ल्ड टी-20 टूर्नामेंट में खेलना होगा। लेकिन वह ऐसा नहीं करेगी क्योंकि आईपीएल भी तो उसकी ही धनकमाऊ फर्म है। वैसे हमारे जो क्रिकेटर्स खेल रहे थे। वह आईपीएल के लगातार होने वाले मैचों के कारण काफी थके हुए थे। थकान उन्हें केवल खेल से ही नहीं अपितु मैेच के बाद डांस और पीने की पार्टी से हुई। फिर उनका अधिकांश समय विज्ञापन करने तथा अन्य प्रोफेशनल कार्यो में जाया होता था। हालांकि बीसीसीआई स्वायत्तशासी संगठन है लेकिन इस वजह से खेल मंत्रालय को चुप नहीं बैठना चाहिए। उसे क्रिकेटर्स के बारे में उचित दिशा निर्देश देने चाहिए। खेल को खेल रहना चाहिए न कि व्यापार बनाना चाहिए। देश खिलाड़ियों की पूजा उनके खेल के कारण करता है लेकिन जब खिलाड़ी खेल के स्थान पर अपनी कमाई पर अधिक ध्यान देंगे तो उनके प्रशंसकों को भी सोचना होगा।

1 टिप्पणी:

  1. एकदम सही कहा आपने। हम लोगों की दीवानगी भी इन सब बातों के लिये जिम्मेदार है।

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