शनिवार, 29 मई 2010

बस सरकार चल रही है

यूपीए सरकार ने कोई ऐसा काम नहीं किया जिससे आम आदमी को राहत मिले। किसी तरह से मनमोहन सिंह अपनी सरकार चला रहे हैं। यह सरकार अपनी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में असमर्थ दिखाई देती है।यह दिशाहीन सरकार है। आम जनता को इससे भविष्य में कोई उम्मीद नहीं है। वस्तुत सरकार चलाना इतना अधिक महत्वपूर्ण नहीं जितना सरकार का काम करना है। दिल्ली में मनमोहन सिंह की सरकार नहीं अपितु भानुमती का कुनबा राज कर रहा है। कांग्रेस की मजबूरी है कि वह सरकार का नेतृत्व कर रही है। सरकार जनाकांक्षाओं पर खरी नहीं उतरी है। सरकार के साझीदार अपनी उंगलियों पर मनमोहन सिंह तथा उनकी नेता सोनिया गांधी को अपनी उंगलियों पर नचा रहे हैं। परस्पर अन्तर्विरोधों के चलते यह सरकार प्रभावशाली भूमिका नहीं अदा कर पा रही है। ममता अलग राग अलाप रहीं है तो शरद पवार अपनी कलाबाजियों खेल रहे हैं। इस सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी इसके नेतृत्व का कमजोर होना है। जो प्रधानमंत्री जनता के सामने से डरता हो। वह जनता द्वारा सीधा चुनकर आने की अपेक्षा बैकडोर से संसद में पहुंचता हो। वह सही अर्थों में जनता का सही प्रतिनिधि नहीं हो सकता। यही वजह है कि प्रधानमंत्री अपने मंत्रियों पर नियंत्रण नहीं रख पाते। अगर वह जनता के द्वारा चुने प्रतिनिधि होते तो निश्चित रूप् से उनमें आत्मविश्वास और स्वाभिमान होता। दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है। आम आदमी के नाम पर वोट लेकर सत्ता में आई इस सरकार का आम जनता से कोई सरोकार नहीं है। वह योजनाएं तो अच्छी बना लेती है लेकिन भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी नौकरशाही पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। आम आदमी को रोटी, कपड़ा और मकान चाहिए। वह उसे मुहैया नहीं हो रहा है। यह देश का दुर्भाग्य है कि सरकारी गोदामों में लाखों टन अनाज बर्वाद हो जाता है लेकिन उसे गरीबों को उपलब्ध कराकर सरकार उनके पेट की आग शांत नहीं करना चाहती। ऐसा नहीं कि यूपीए सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। उसने कई ऐसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को अंजाम दिया है जो देश की कायाकल्प कर सकता है। शिक्षा गारंटी योजना, मनरेगा, शेैक्षिक ढांचे का पुर्नगठन सहित परमाणु समझौता आदि ऐसे काम है जो भारत का भाग्य बदल सकते हैं। मनमोहन सिंह ईमानदार और स्वच्छ छवि के हैं। उनके नेतृत्व में सरकार केवल चल रही है और उसकी योजनाओं से जनता को सीधा फायदा भ्रष्टाचार और कुशासन के कारण नहीं पहुंच रहा है।

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