शुक्रवार, 4 जून 2010

श्री श्री रविशंकर पर हमला कितना सच

विगत दिनों आर्ट ऑफ लिविंग मिशन के प्रणेता रवि शंकर पर हमला हुआ। इस हमले को जहां रविशंकर ने अपने ऊपर जान से मारना करार दिया जबकि इसके विपरीत राज्य सरकार सहित गृहमंत्री चिदम्बरम ने इसे अधिक गंभीरता से नहीं लिया। बल्कि इसे उनके शिष्यों का आपसी झगड़ा करार दिया। वेसे भी इस मामले में कई ऐसे पेंच हैं जिनका खुलासा होना आवश्यक है। घटना के लगभग चार घंटे बाद पुलिस को इसकी जानकारी देना अपने आप में संदेह पैदा करता है। अगर यह घटना आज से दशकों पहले हुई होती तो रविशंकर के इस बयान पर भरोसा किया जा सकता था। क्योंकि उस समय दूरसंचार के इतने अधिक साधन उपलब्ध नहीं थी। जबकि रविशंकर हाईटेक से जुड़े हैं। उनके पास दूरसंचार के अत्याधुनिक साधन हैं। वह एक मिनट में ही सारी दुनियां में अपना संदेश प्रसारित कर सकते थे। अतः इतनी देर बार पुलिस का सूचना देना समझ से बाहर है। सवाल यह पैदा होता है कि आखिर रविशंकर पर हमला हुआ तो क्यों हुआ। वह किस विचारधारा के आतंकवादियों के निशाने पर हैं। कोई उन्हें क्यों मारना चाहता है ? वह सरकार के खिलाफ क्यों बयान जारी कर रहे हैं ? उनके पास बिलम्ब से सूचना देने का कोई तार्किक उत्तर नहीं है।

अराजक तत्वों के हौंसले बुलंद
रविशंकर देश का ऐसा व्यक्तित्व है जिनके अध्यात्म और आर्ट ऑफ लिविंग मिशन का लोहा समूचा विश्व मानता है। उन पर हुआ हमला बहुत शर्मनाक है। अगर ऐसे व्यक्तित्व पर हमला हुआ तो देश में कोई भी सुरक्षित नहीं हैं। इस मामले के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। सरकार इस मामले में चुप रही तो ऐसे अराजक तत्वों के हौंसले बुलंद हो जाएंगे।

कहां गयी रविशंकर की सुरक्षा व्यवस्था
लेकिन समय में जबकि अध्यात्म और योग विशुद्ध व्यवसाय में बदल गये हैं। धर्मगुरू अपनी सुरक्षा व्यवस्था के प्रति काफी सचेत रहते हैं। अधिकांश गुरूओं को सरकार से सुरक्षा बल दिये गये हैं। इसके बावजूद वह लोग निजी अंगरक्षक रखते हैं। जब छुटभैये गुरुओं के पास सुरक्षा की व्यवस्था होती है तो रविशंकर जैसे अध्यात्मिक गुरु की निजी सुरक्षा कहां गई। जब उन पर गोली चलाई गई।

हो सकती है आपसी प्रतिद्वंदता
अध्यात्मिक गुरु पर हमला आपसी प्रतिद्वंदता का परिणाम भी हो सकती है। देश में जितने भी अध्यात्मिक व धार्मिक गुरु हैं। वह निरंतर अपना प्रभाव बढ़ाने में लगे रहते हैं। इनके आश्रम अत्याधुनिक सुविधाओं से सज्जित होते हैं। धन का बेशुमार भंडार होता है। धर्मगुरुओं की आपसी प्रतिद्वंदता का परिणाम भी हो सकता है यह हमला। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साधुओं को भी ऐसी घटना से भयभीत नहीं होना चाहिए।

निर्विवाद है रविशंकर का व्यक्तित्व
अध्यात्मिक गुरूओं में रविशंकर निर्विवाद व्यक्ति हैं। उन्होंने आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से शंाति का संदेश दिया है। उन पर हुआ हमला कायराना है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इस हमले से शंाति प्रेमियों को धक्का लगा है। सरकार को उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। यह सौभाग्य की बात है कि इस हमले से श्री रविशंकर बच गये। उनका जीवन मानव सेवा और अहिंसा को समर्पित है।

क्यों भयभीत रहते हैं धर्मगुरु
वस्तुतः श्री रविशंकर पर हुआ कथित हमला समझ से बाहर है। हमारे गृहमंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि हमले का निशाना रविशंकर पर नहीं था। विचारणीय प्रश्न यह भी है कि ये अध्यात्मिक और धार्मिक गुरू भयभीत क्यों रहते हैं ? सवाल यह है कि यह लोग भयभीत क्यों रहते हैं। जब यह लोग कहते हैं कि हानि, लाभ, जीवन, मरण, यश, अपयश विधि हाथ, तो फिर परेशान क्यों हैं। वास्तविकता यह है कि हमारे धर्मगुरू विलासिता का जीवन जीते हैं। इनके पास अकूत संपदा होती है। शायद इसी कारण यह भयभीत रहते हैं।

3 टिप्‍पणियां:

  1. वास्तविकता यह है कि हमारे धर्मगुरू विलासिता का जीवन जीते हैं। इनके पास अकूत संपदा होती है।
    नि:सन्देह

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  2. सोचने पर मजबूर कर दिया आपके तर्कों ने

    प्रभावशाली पोस्ट

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  3. dharm guruo ne desh ki izzat mitti me mila di hai. OSHO ki bato ko namak mirchi lga apni bta kr janta ki bhid jutane wale farzi guruo ne vichar krna chahie k kya ve bhi OSHO ke saman swayam bhamh ko uplabdh hue hai athwa nhi.

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