शनिवार, 17 जुलाई 2010

भविष्य जानने की उत्कंठा क्यों ?

अभी फुटबॉल विश्वकप ने ज्योतिष को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। स्पैन के विजेता बनने पर उसकी हर जगह जयजयकार हो रही है। लेकिन जर्मनी में उसके खिलाफ विरोध के स्वर भी गूंज रहे हैं। आखिर एक जलजीव ने ऐसा कर दिखाया जो हमारे बड़े से बड़े ज्योतिषी भी करने में संकोच करते हैं। अतः ज्योतिष की भारत के बाहर भी पुर्नस्थापना हो रही है। लेकिन वास्तव में ज्योतिष क्या है। ? इसकी भविष्यवाणियों का क्या पैमाना है। यह सिर्फ अटकलबाजी है अथवा कोई विज्ञान। इस संदर्भ में आम आदमी भी ज्योतिषियों से अपने भविष्य के बारे में जानना चाहता है। वस्तुतः हर आदमी अपने अतीत को भूल जाना चाहता है और भविष्य की ओर देखता है। इसी भविष्य निर्माण के लिए वह मेहनत, अध्ययन और कर्म करता है। परंतु सवाल पैदा होता है कि क्या उसे अपने कर्म पर विश्वास नहीं है जो अपने भविष्य के लिए चिंतित रहता है। हमारे विद्वानों ने लिखा भी है कि कर्म का लेख मिटे न रे भाई। फिर वह लेखे को मिटाने के लिए ज्योतिष की शरण में क्यों जाता है।
ज्योतिष हमेशा से ही कुछ लोगों के लिए कमाई का जबर्दस्त साधन रहा है। कुछ लोग बैल के माध्यम से भविष्य बताते हैं तो कुछ कुत्ते के माध्यम से। सड़कों पर तोतों के माध्यम से भी भविष्य की जानकारी दी जाती है। क्योंकिमनुष्य स्वभाव से जिज्ञासु होता है। वह अपने भावी जीवन के बारे में जानना चाहता है। इसीलिए वह इन कथित ज्योतिषियों के षरण में चला जाता है। वैसे कर्म का बीज कभी बंजर नहीं होता। हमारे कर्मों से ही भविष्य का निर्माण होता है। हमें अतीत को भूल जाना चाहिए। भविष्य की चिंता नहीं करनी चाहिए और वर्तमान को सुखद बनाने का प्रयास करना चाहिए। तभी भविष्य सुखद हो सकता है। भविष्यवाणी करने के लिए गहन अध्ययन और मनन की जरूरत पड़ती है। लेकिन यह पुरातन विद्या भी व्यापार का रूप धारण कर चुकी है। ऐसे परिवेश में सही निष्कर्ष निकलना असंभव सा लगता है। वस्तुतः ज्योतिष एक विज्ञान है और उसके लिए ग्रह, नक्षत्र आदि की सटीक गणना आवश्यक है। कुछ कथित भविष्यवक्ता का तीर में तुक्का लग जाता है और वह लोकप्रिय हो जाते हैं। वैसे भविष्य की चिंता कर्महीन लोग ही करते हैं। हो सकता है कि उनका वर्तमान दुखद हो जिससे वह भावी सुखद जीवन की कल्पना के वशीभूत होकर अपना भविष्य जानने की उत्कंठा रखते हों।
भविष्य के प्रति हर व्यक्ति का उत्कंठित रहना स्वाभाविक ही है। वह अपना, अपने परिवार, समाज व देश का भला चाहता है। इसी के वशीभूत होकर वह भविष्य के प्रति जानने की इच्छा के कारण ज्योतिषियों के पास जाता है। लेकिन ज्योतिष खगोलीय विज्ञान है। सूर्य और चद्र पर आधारित हमारा ज्योतिष पूर्णतः वैज्ञानिक है। लेकिन भविष्यवाणी करना असाध्य कार्य है। हां इतना अवश्य है कि कथित ज्योतिषियों ने कुछ फंडे ईजाद कर लिए है। जिनसे वह मरीज, वृद्ध, महिलाओं व व्यापारियों का दोहन करते हैं। हां कुछ लोग भविष्य की परवाह नहीं करते। लेकिन इससे उनके भविष्य पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। हर व्यक्ति के जीवन पर नक्षत्र और राशियों का प्रभाव पड़ता है। जब बच्चा मां के गर्भ से बाहर आता है तो उस पर खगोलीय किरणें पड़ती हैं। नक्षत्रों के आधार पर ही जन्मकुंडली बनाई जाती है। इसमें समय का बहुत महत्व है। लेकिन ज्योतिषीय गणना दुरूह और असाध्य साधना है। धंधेबाज लोगों के पास इतना समय ही नहीं होता कि वह कठोर साधना करें। इसीलिए ऐसे लोगों के ज्योतिषीय परिणाम असफल रहते हैं। यह वस्तुतः दैवीय विधा है जो निरंतर साधना और तपस्या मांगती है।
आज का हर आदमी सुख-साधन की कामना में रत रहता है। वह चाहता है कि सारी दुनियां के सुख साधन उसके पास हों। इसीलिए वह भविष्य के सपने देखता है। पहले आदमी संतोषी होता था। वह भाग्यवादी भी था। लेकिन बदलते परिवेष में उसका मन चलायमान हो गया है। अमीर देशों में लोगों को भविष्य को जानने की चिंता नहीं रहती क्योंकि उनके पास सब कुछ है। वह जब चाहे अपनी इच्छा पूरी कर सकता है। लेकिन गरीब और अभावग्रस्त लोग भविष्य की ओर टकटकी लगाये रहते हैं कि शायद उनके दिन पलट जायें। भविष्यवाणी का प्रतिफल 70 से 80 फीसदी होता है। किसी भी विषय पर अचूक भविष्यवाणी संभव नहीं है। लेकिन इन बातों को हमारे व्यापारी ज्योतिषी हवा दे रहे हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य लोगों से धन ऐंठना रह गया है। ज्योतिष में यह लोग व्यापारी जैसा हर हठकंडा अपनाते हैं। जबकि ज्योतिष विज्ञान है। इसके लिए गहन अध्ययन की आवष्यकता होती है। जब ज्योतिषियों के पास अपने क्लाइंटों से ही फुर्सत नहीं है तो वह सही गणना कैसे करते होंगे। मेरी समझ के बाहर है। भविष्य को बदलने की किसी के पास क्षमता नहीं होती। ईश्वर के विधान में कोई दखलंदाजी कर ही नहीं सकता। हां इतना अवश्य है कि अच्छा ज्योतिषी भावी जीवन के कुछ संकटों को उदार बना सकता है। वह भी डाक्टर की भांति केवल मार्गदर्शक है। भविष्य के लिए उत्कंठा होना स्वाभाविक ही है। आदमी चेतनशीलहोता है। वह चाहता है कि उसका भविष्य अतीत और वर्तमान से अच्छा हो। यही उत्कंठा उसे खींचकर ज्योतिषियों के पास ले आती है। ज्योतिष कि दुकानी इस तरह खुल गयी हैं कि हर शहर में बैल और कुत्ते को लेकर कुछ लोग भविष्य बताते हैं। जानवरों में सूंघने की क्षमता अधिक होती है। अतः वह जिस मुट्ठी में कुछ होता है। उस पर अपना मुंह अथवा पैर लगा देता है।

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