शनिवार, 11 दिसंबर 2010

वाराणसी विस्फोटःआस्था पर हमला

विगत दिनों वाराणसी में गंगा आरती के समय हुए आतंकी हमले ने समूचे देशवासियों को झकझोर कर रख दिया है। जिस समय लोग आस्था और श्रद्धा के साथ सायंकाल गंगा की आरती उतार रहे थे। उन्हें सपने में भी ख्याल नहीं था। आखिर यह ख्याल उन्हें आता क्यों ? आखि रवह इस आरती को सदियों से परम्परागत रूप से करते आ रहे हैं। वाराणसी में सभी धर्मों के लोग आपसी सद्भाव और भाईचारे से रहते हैं। फिर इस तरह की कुत्सित और अमानवीय विस्फोट का क्या मतलब है। समझ में नहीं आता कि आखिर आतंकवादी चाहते क्या हैं ? क्या वह देश की साझी संस्कृति को ध्वस्त करना चाहते हैं अथवा यहां के आपसी सद्भाव को चोट पहुंचाकर अपने मंसूबे पूरा करना चाहते हैं। इस हमले से इतना तो स्पष्ट है कि देश में आतंकवादियों ने जबर्दस्त घुसपैंठ बना ली है। यह हमले भले ही विदेशी शत्रुओं द्वारा प्रायोजित हों लेकिन इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता कि उन्हें इसी देश के लोगों से संरक्षण और मदद मिलती है। जब तक हम अपने बीच के विभीषणों और जयचंदों को नेस्तनाबूद नहीं करेंगे। उनके मुख से नकाब नहीं उठायेंगे। तब तक आतंकी अपने काले कारनामों को अंजाम देते रहेंगे। इस विस्फोट के संदर्भ में हमें आतंकी मानसिकता और विचारधारा पर भी मंथन और चिंतन करना होगा कि आतंकी हमारी गंगा-जमुनी विरासत के अलमस्त शहर वाराणसी को क्यों बार-बार अपना निशाना बना रहे हैं। यह मामला हमारी आस्था और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है। इस घटना ने हमारे अंतर्मन को घायल ही नहीं किया बल्कि हमारी आस्था और विश्वास को ललकारा भी है। इस घटना के तार प्रतिबंधित सिमी से जोड़ा जा रहा है जिसने प्रतिबंध के बाद अपना नाम बदल लिया है। आतंकी सोचते थे कि इस हमले से हिंदू भड़क उठेंगे और अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए अनहोनी करेंगे। परंतु आतंकियों के इस मंसूबे को धराशायी किया है वाराणसी के निवासियों ने। उन्होंने इस घटना के बाद भी भय और आतंक से अपने को परे रखकर आतंकी संगठनों को करारा जवाब दिया है। सिमी और संघ को एक जैसा संगठन बताने वालों की आंख खुल जानी चाहिए कि किस प्रकार कट्टरवादी इस्लामी ताकतें देश की एकता और अखंडता को विखंडित करने में जुटी हुई हैं। अब किंतु-परंतु से काम नहीं चलेगा अपितु अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति से आतंकियों को समूल नष्ट करना होगा। आखिर कब तक आतंकी देश की आस्था और श्रद्धा को लहूलुहान करते रहेंगे।

1 टिप्पणी:

  1. संघ और विश्व हिन्दू महासभा को हिन्दू आतंकवाद की संज्ञा से परिभाषित करने वाले वित्त मत्री महोदय को इस घटना के बाद समझ लेना चाहिए की हिन्दू और इस्लामिक आतंकवाद अलग नहीं होता है आतंकवाद आतंकवाद होता है ! हिन्दू अहिंसा परमो धर्म के सिधांत पर आधारित है इसका परिचय वाराणसी वासियों ने दिया है साधुवाद -बोधिसत्व कस्तूरिया

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